ॐ नमो हनुमते उर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय रुं रुं रुं रुं रुं रूद्रमूर्तये प्रयोजन निर्वाहकाय स्वाहा ||

अंजनीगर्भसम्भूताय कपीन्द्र सचिवोत्तम रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमान रक्ष रक्ष सर्वदा ||

आञ्जनेय-वायूपुत्र-केसरीनन्दन-रामदूत-बजरंग बली हनुमान आठ चिरंजीवियों में से एक हैं । बचपन से ही महा-पराक्रमी इस कलयुग के प्रकट देवता हैं । बाल्यकाल में ही सूर्य को अपने मुंह में रखकर अपने पराक्रम को सर्वविदित करा दिया । इंद्रादि देवताओं के मनाने पर भी जब सूर्य को नहीं छोड़ा, तब इंद्र के वज्र प्रहार से हनु (थोड़ी- Chin) टूट गई व मूर्छित हो गये । वायू देव के रुष्ट होने पर ब्रह्मा जी द्वारा चेतन किया गया व अनेक वरदान प्राप्त किये जिसमें ब्रह्मास्त्र का भी असर ना होना था व हनुमान नाम विख्यात हुआ । वानर-राज सुग्रीव के सखा व मंत्री, श्रीराम के अनन्य भक्त रामायण के अभिन्न पात्र हैं । पूरा सुन्दर-काण्ड जिनके पराक्रम को दर्शाता है, जिसके तहत सीता की अथाह-सागर पार खोज व लंका-दहन वर्णित है । राम-रावण युद्ध में शक्ति प्रहार से जब लक्ष्मण मूर्छित हुये तो सुदूर हिमालय से संजीवनी बूटी के ना पहचान होने पर, पूरा पर्वत उठा लाना उनके समयानुसार पराक्रम को प्रदर्शित करता है । अहिरावण वध से लेकर अन्य कई संदर्भ श्रीराम की रावण-विजय में हनुमान जी की मुख्य भूमिका दर्शाता है । अपने ह्रदय में सिया-राम की छवि लिये श्रीराम के प्रमुख भक्त कहे गये हैं । महाभारत काल में भी भीम के घमंड को तोड़ कर, अर्जुन के रथ पर सवार होकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । देवी के साथ सदा रहने वाले श्री हनुमान जी को बारंबार प्रणाम है ।।
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अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम् दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् । सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम् रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ||

ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय पंचवदनाय दक्षिण मुखे कराल बदनाय नारसिंहाय सकल भूत प्रेत दमनाय रामदूताय स्वाहा ।

Om Shri Hanumate Namah

Great Son of Anjani- God of Wind-Vayu-Kesari, Important messenger of Shri Ram, The Powerful Hanuman is one of eight long-lived, Immortal deity as human being. Hanuman is a live God on earth. During childhood Hanuman once took Sun in his mouth and Indra – King of deities hit him by his weapon Vajra on his chin, by which Hanuman Chin broke. But intervention of Brahma ji gave him rebirth and named Hanuman. Also Brahma Ji gave him safe passage from all weapons including the deadly weapon- Brahmastra. Good friend and minister of Vanar-raj Sugreev and prime devotee of Shri Ram, is an integral part of Ramayana. One whole chapter is in his name – ” The Sundar Kand” where he found abducted Seeta and burn Lanka. When Lakshman got hit of Shakti thrown by Meghnada – Son of Ravana, he went far-North to get Sanjeevani-Booti but due to non-identification he brought whole mountain for his rescue and saved his life. Including Ahiravan death he played a very vital role in victory of Shri Ram on Ravana in Ramayana. Keeping the image of Seeta-Ram in his heart had played vital role in era of Mahabharta also. He destroyed the arrogance of Bhim and stayed on Chariot of Arjun, an important part of Mahabharata till the end of war and saved Arjun. Always stay with Goddess. I salute this deity with closed hands.

hanuman jayanti
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